Wednesday, 6 December 2017

Childhood Is Struggling



# 03 Nov 2017 #IMStruggling #12YearBoy#Channewala#ChildhoodStruggling
शाम के करीब 5 बजे होंगे, मैं नॉएडा में सेक्टर 12-22 के पास फ्यूल भरवाने के लिए लाइन में लगा हुआ था !तभी एक बच्चा जिसके हाथ में एक बाल्टी थी और उसमे चने भरे हुए थे मेरी खिड़की के पास आता हैं और मुझसे चने लेने के लिए पूछता है , वो इतने छोटा और मासूम बच्चा था की मुझे समझ ही नहीं आया की ये हो क्या रहा है!मैंने पहले तो अपनी कार मैंने रखे 2 बिस्कुट क पैकेट उसे दिए और बोला की जरा रुकना मुझे तुमसे बात करनी है!, मैंने कार PUMP पर लगायी और फिर उस बच्चे को बुलाया !उससे बात करके जो पता लगा उसे सुन कर मुझे ऐसा लगा जैसे बचपन कहीं खो सा गया है!
ये हैं हमारी बातचीत के कुछ अंश
मैं:  तुम्हारा नाम क्या है ?
बच्चा : राहुल(काल्पनिक)
मैं :  पढ़ते नहीं हो क्या?
बच्चा : पढता हूँ पांचवी क्लास में सरकारी स्कूल में ! दोपहर के बाद ये काम करता हू !
मैं : तुम्हारी उम्र क्या हैं और कब से कर रहे हो ये काम !
बच्चा : 12 साल का हूँ और 4 साल से कर रहा हू !
मैं:  मतलब 8 साल की उम्र से ? किसने सिखाया ये काम ?
बच्चा : किसी ने नहीं , खुद ही देख देख कर सीख गया !
मैं : घर मैंने कौन कौन हैं , पापा क्या करते हैं और किसने बोला है ये काम करने को !
बच्चा : 2 साल का बड़ा भाई है वो घर पर रहता है , मम्मी भी घर पर रहती हैं और पापा टेलर हैं नौकरी  करते है
मैं : क्यों करते हो ये काम इस उम्र में , कितना पैसा कम लेते हो रोज़ और क्या करते हो उसका !
बच्चा : सर 200 -300 रुपया बन जाते है और मम्मी को दे देता हु ताकि उनकी थोड़ी मदद हो जाये!ये जवाब सुन कर में इतना हैरान था की बता भी नहीं सकता ! ये सोच कर की 8 साल का बच्चा इतनी बढ़ी बात कैसे सोच सकता है ,जिस उम्र में बच्चो को ठीक से अपने और पराये की पहचान तक नहीं होती , वो इतना कैसे सोच सकता है और सोच क बाद ऐसा डिसिशन ले सकता है जो अच्छे अच्छे नहीं ले पते, वो पढता भी हैं और शाम मैंने काम करता है ताकि माँ की मदद कर सके.
जिन हाथो में खिलोने होने चाइए उस हाथ मैंने चने की बाल्टी लेकर आवाज़ लगा रहा है , जिस बैग मैंने बुक्स होनी चाइए उसमे पैसे और जिस दिमाग में शैतानिया होनी चाइए वहा पैसो का हिसाब है , इतना बड़ा हो गया हैं इतनी सी उम्र में !
वो इतना समझदार भी है कि जब मैंने उसके पापा का नंबर माँगा या घर का पता पूछा तो उनसे बताया ही नहीं !उसे शायद ये लगा की मैं उसका काम बंद करा दूंगा ! इतने मैंने कुछ लोगो वहा इकट्टे होगए और मुझसे पूछे लगे की आप किस संस्था से आये हो जो इतना पूछताछ कर रहे है ! मैंने बताया की मैंने किसी संस्था से नहीं हूं !
आस पास के लोगो से पूछने पर पता लगा की ये यहाँ 4 साल से आ रहा है, बहुत बार भगाया है यहाँ से की अभी तू भुत छोटा है तो मत किया कर ये काम , बुत ये मानता ही नहीं उस 15 मिनट मैंने मैंने जाना की इस जीवन की भाग दौड़ मैंने बस बचपन की पीछे नहीं छूटा है बल्कि संघर्ष करने मैंने भी बचपन ने जवानी को छोड़ रहा हैं
और ये के करार जवाब है उन लोगो के लिए जो सोचते है की बस हम ही क्यों संघर्ष कर रहे हैं !
अगर लगन हो और कुछ करना का जज्बा हो तो उम्र की कोई सीमा नहीं , समय का कोई बहाना नहीं , !  

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